World Daughters Day : बेटियों की गरिमामई मौजूदगी को सराहने का दिन

घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं
बेटियाँ धान के पौधों की तरह होती हैं

  • मुनव्वर राना

इस दुनिया के सृजन में बेटियों के महत्व को उजागर करने और उनकी सुखद उपस्थिति को महसूस करने के लिए हम साल के एक दिन को बेटी दिवस के तौर पर मनाते हैं। सितंबर माह के आखिरी रविवार को अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस मनाया जाता है। मुख्यत भारत जैसे देश में जहां बीती कुछ सदियों में बेटियों के वजूद पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा। ऐसे में उन्हें अपनी भूमिका के बारे में अवगत कराने और उनके महत्व को स्वीकारते हुए हमारे देश में इसे मनाया जाता है।

आज देश के हर क्षेत्र से निकलकर भारत और भारत के बाहर अपने नाम का लोहा मनवाने वाली ये लक्ष्मियां हमारे लिए गर्व का विषय हैं। सरकार और लोगों के मिले जुले प्रयासों से आज बेटियां अपनी काबिलियत को बखूबी सिद्ध कर रही हैं। तभी तो हम गर्व से कहते हैं, हमारी बेटियां छोरों से कम हैं के। खेलों से लेकर पढ़ाई तक, जमीन से लेकर आसमान तक, नौकरी से घर की जिम्मेदारी तक अभी जगह अपनी करिश्माई छवि बनाने वाली ऐसी सभी करोड़ों बेटियों को शत शत नमन। बेटियों के लिए एक प्रसिद्ध कवियत्री कविता तिवारी कहती हैं

जिम्मेदारियों का बोझ परिवार पर पड़ा तो
ऑटो, रिक्शा, ट्रेन को चलाने लगी बेटियां

साहस के साथ अंतरिक्ष तक बेध डाला
सुना वायुयान भी उड़ाने लगी बेटियाँ

और कितने उदाहरण ढूंढ कर लाऊ
हर शक्ति क्षेत्र आजमाने लगी बेटियाँ।

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