उत्तराखण्ड : सुप्रीम कोर्ट का पूर्व राज्य मंत्री हेमंत द्विवेदी के हक में फैसला, फर्जी FIR के षड्यंत्र का जिम्मेदार कौन?

“सत्य परेशान जरूर हो सकता है लेकिन पराजित नहीं होता।” यह उक्ति इस मामले में बिल्कुल सटीक बैठती है जहां देश की सबसे बड़ी अदालत ने वर्ष 2018 से राजनैतिक द्वेष और षड़यंत्र के कारण झूठे मुकदमे में फंसे भाजपा नेता हेमंत द्विवेदी के पक्ष में फैसला सुनाया और सत्य की गरिमा स्थापित की।

उत्तराखंड के भाजपा नेता और पूर्व दर्जा राज्य मंत्री (राज्य तराई बीज निगम के पूर्व चेयरमैन) हेमंत द्विवेदी को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2018 के एक मामले में बड़ी राहत दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इस केस की FIR को झूठा करार दिया और उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश दिया।

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क्या है पूरा मामला

दरअसल यह मामला मार्च 2018 का है। जिसमें राजनैतिक द्वेष के चलते और छवि खराब करने के उद्देश्य से राज्यमंत्री हेमंत द्विवेदी पर फर्जी आरोप लगाकर केस दर्ज करा दिया गया। यह मुकदमा भूमि के अवैध कब्जे को लेकर किया गया जो कि बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूरी तरह से निराधार पाया गया।

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कौन था षड़यंत्र में शामिल

नैनीताल के तात्कालिक SSP जन्मेजय खंडूरी द्वारा राजनैतिक दबाव के चलते इस फर्जी मामले से संबंधित एफआईआर हेमंत द्विवेदी के विरुद्ध दर्ज कर ली गई। जो कि राजनैतिक गलियारे की चुटकियों पर इस काम को अंजाम दे रहे थे। इस फर्जी मुकदमे को अमली जामा पहनाने का असल कार्य सरदार जितेंद्र पाल सिंह द्वारा किया गया। जिस पर खुद कई तरह के आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनकी हरकतों को राजनैतिक और पुलिस प्रशासन के उन सभी लोगों का साथ मिलता रहा जो कि एक ही थैली के चट्टे बट्टे थे।

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मामले में हाईकोर्ट का रुख

इस संपूर्ण साजिशी घटनाक्रम के दौरान हेमंत द्विवेदी को कई बार निराशा हाथ लगी लेकिन आखिरकार उनकी जीत हुई। पुलिस द्वारा दायर किए गए इस मुकदमे के विरोध में जब हेमंत द्विवेदी उच्च न्यायालय पहुंचे तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। हार न मानते हुए उन्होंने फिर सुप्रीम कोर्ट की शरण ली और 2 वर्ष के पश्चात उनका पक्ष पूरी तरह सही पाया गया जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही

गौरतलब है कि इसी मामले की सुनवाई के दौरान 6 दिसंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल के डीएम को संबंधित भूमि का सही नाप कराने का आदेश दिया था। DM की निगरानी में नैनीताल SDM ने जमीन की माप कराई। इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

3 नवम्बर 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति संजय किशन कौल द्वारा इस मामले में आखिरी निर्णय सुनाया गया। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत द्विवेदी के खिलाफ भीमताल में दर्ज की गई FIR को अवैध पाया और इसे तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में जो महत्वपूर्ण बातें सम्मिलित की वो उस प्रकार हैं –

  • भीमताल थाने में दिनांक 04/03/18 को दर्ज कराई गई FIR को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।
  • SDM नैनीताल की भूमि माप संबंधी रिपोर्ट के आधार पर किसी भी तरह के भूमि कब्जे की पुष्टि नहीं होती है।
  • मुकदमा दायर करने वाले पक्ष की ओर से इसे राजनैतिक प्रभाव का उपयोग कर आपराधिक रंग देने की कोशिश की गई जबकि यह जमीनी मामला है जो कि सिविल दायरे में आता है।
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा रुख साफ करते हुए कहा गया है कि नैनीताल SDM द्वारा संपूर्ण जांच के बाद दी गई रिपोर्ट को आखिरी माना जाए और संबंधित पक्ष उसका पालन करें।

सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर

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