उत्तराखण्ड : एसे हुईं थी प्रसिद्धि तीर्थस्थल ‘हेमकुंड साहेब’ की खोज! – यहा पढ़ें

उत्तराखंड पूरे देशभर में देवभूमि के नाम से मशहूर है। जहां कई सारे दर्शनीय और तीर्थ स्थल स्थित हैं। चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के अतिरिक्त यहां बहुत से विख्यात तीर्थस्थल मौजूद हैं। इन सभी स्थलों पर वर्षभर दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है। इन्हीं में से एक है चमोली जिले में 15225 फीट की ऊंचाई पर स्थित सिक्खों का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब। देश विदेश से कई लोग यहां आते हैं। बताया जाता है कि इसकी खोज 1934 में हुई थी।
साल 1937 में यहां पर यात्रा शुरू हुई। श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के मुख्य प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि हेमकुंड साहिब में पहला गुरुद्वारा 1936 में बनाया गया था, जबकि साल 1937 में गुरु ग्रंथ साहब की पहली अरदास हुई थी।

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क्षेत्र के इतिहासकार और पर्यटक विशेषज्ञ पूर्व मंत्री केदार सिंह फोनिया की डिवाइन हेरिटेज ऑफ हेमकुंड साहिब एंड वर्ल्ड हेरिटेज ऑफ वैली ऑफ फ्लावर किताब के अनुसार 1930 के दशक में पत्रकार तारा सिंह नरोत्तम बदरीनाथ यात्रा पर आए थे। उन्होंने पांडुकेश्वर से यहां आकर इसकी खोज की और अपने लेखों के जरिए पंजाब के लोगों को हेमकुंड साहिब का विवरण दिया। वर्ष 1934 में सेना के हवलदार मोदन सिंह ने यहां आकर गुरुवाणी में लिखी पंक्तियों से इस तीर्थ का मिलान किया।

हेमकुंड साहिब यात्रा क्षेत्र अब 4जी नेटवर्क से जुड़ गया है। 13650 फुट की हाइट पर बने हेमकुंड में रिलायंस जियो ने अपनी 4जी सेवाएं शुरू कर दी हैं।

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